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Agriculture

किसान विकास एवं पर्यावरण संस्थान

(कृषि विकास को समर्पित)

प्रिय किसान बधुओं,

A. कभी आपने महसूस किया है आपके लिये एक रंग बिरंगी पकवान भरी थाली परोसी गई हो, आप भूखे हो लेकिन आपके पास दोनों हाथ न हो, ऐसे में आपकी मनोदशा क्या होगी?

B. ठीक इसी प्रकार पेड पौधों की मनोदशा भी होती है, जब मिट्टी में उनकी जड़ों के पास विभिन्न प्रकार के उर्वरक हार्मोन्स विटामिन्स आदि डाले जाते हैं। किन्तु पौधें उसे ग्रहण करने में असमर्थ होतें हैं। आखिर क्यों ?

C. बहुत पुराने समय से ही मनुष्य प्राकृतिक तन्त्र को नष्ट करके अपनी इच्छानुसार बदलता रहा है। साथ ही वह अपनी इच्छानुसार विभिन्न फल उगाने व फलों के उद्यान लगाने के लिये भी प्राकृतिक पारिस्थितिक तन्त्र को नष्ट करता रहा है।

D. अन्धाधुन्ध बिना सोचे समझे रासायनिक खादों और रासायनिक कीटनाशाकों के प्रयोग से पारिस्थितिक तन्त्र का संतुलन बिगडता गया क्योंकि जिस पोषक तत्व की जरूरत है उसे डालते नहीं और जिसकी जरूरत नहीं है उस तत्व को बिना सोचे समझे प्रयोग किया जाता है। जिसके परिणामस्वरूप जिसका जरूरत है खेत में उगा नहीं एवं जिसकी जरूरत नहीं वह उग आता है क्योंकि अधिक मात्रा में रासायनिक खाद, कीटनाशक, खरपतवार नाशक डालने से पारिस्थितिक तन्त्र का संतुलन बिगडता गया।

E. परन्तु कीट एवं रोगों तथा खरपतवारों का नियंतत्र करने के लिये कृषक अब विभिन्न प्रकार के रासायनिक दवाओं के प्रयोग में विश्वास कर चुका है और इस दिशा में काफी पैसा खर्चा कर रहा है। सच बात यह है कि इन दवाओं के प्रयोग से कृषक को कोई आभास नहीं हो पा रहा है।

F. अप्रत्यक्ष रूप से जो हानियां कृषकों को हो रही है उनका कुछ आभास कुछ जागरूक कृषकों को हो रहा है। परन्तु वह भी पूर्ण रूप से नहीं जानते कि अत्यधिक रासायनिक दवाओं के प्रयोग से क्या-क्या हानियां हो रही है जो कि बढ़ता ही जा रहा है और आने वाले भविष्य में क्या रूप लेगी।

G. यहाँ पर यह बतलाना होगा कि फसलों पर रासायनिक दवाओं के अधिक प्रयोग के कारण क्या-क्या हानियाँ हो रही हैं।

1. कीड़ों में विष सहन करने की क्षमता बढ़ रही हैं परिणाम स्वरूप उक्त कीड़े निर्धारित दवा की मात्रा से मरते नहीं हैं। अतः कृषकों को अधिक दवा की मात्रा डालना पड़ता है।

2. अधिक रासायनिक दवा का प्रयोग करने से पौधों, अनाजों, फलों, सब्जियों में विष-अवशेष की मात्रा भी निरन्तर बढ़ती जा रही है। अतः उस फल-सब्जियों का उपयोग करने पर मानव एवं पशु पक्षियों के स्वास्थ्य पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव डालती है और कई प्रकार की बीमारियों को जन्म देती जा रही है। आज हम लोगों को नई नई बीमारियों का नाम सुनने को मिलता है।

3. रासायनिक दवाओं के अधिक प्रयोग से फसलों में उत्पादन निरंतर घटती जा रही है। इस प्रकार कृषि मेें लाभ निरंतर कम होता जा रहा हैं। जो कि एक भयंकर चिंता का विषय बन चुका है क्योंकि बढ़ती हुई भयंकर जनसंख्या का पेट अनाज से ही भरता है।

H. क्योंकि आप जिस भूमि में उसे आश्रय देते है उस भूमि को आप दिन प्रतिदिन रासायनिक उर्वरकों कीटनाशकों, फफूदनाशकों एवं खरपतवार नाशकों के अनुचित मात्रा में प्रयोग से विषैला एवं प्रदूषित कर रहे हैं। परिणाम स्वरूप मिट्टी उर्वरा शक्ति क्षीण होती चली जा रही है। जैसा कि आप जानते है कि मिट्टी में बहुत सारे लाभदायक जीवाणु और फफूँद पाए जाते है जो अदृश्य होकर पौधों व हमारे जीवन को लाभ पहुँचाता है ये पौधों की जडों के आस-पास के दुश्मन कीट, फफूँद एवं जीवाणुओं से रक्षा करते हैं। ये लाभदायक जीवाणु पोषक तत्वों की उपलब्धता को बढाते है एवं मिट्टी व पौधों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व प्रदान करते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यह महसूस किया जा रहा है कि रासायनिक उर्वरक कीटनाशक व विभिन्न प्रकार के कृषि रासायन के प्रयोग सेे मानवीय जलवायु एवं पशु-पक्षियों पर दूषित प्रभाव पर रहा है।

1. उक्त बातों को ध्यान में रखते हुये यह आवश्यक हो गया है कि हमारे जागरूक किसान जैव उर्वरक एवं जैव कीटनाशकों को व्यवहार में लावें तथा जैव तकनीकियों का प्रयोग करें।

2. इस दिशा में अग्रसर किसान विकास एवं पर्यावरण संस्थान की एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण योजना (जिसमें, जैविक खाद एवं कीटनाशक बनाने, वायो डीजल खेती एवं वागवानी की प्रशिक्षण दी जा रही है।) अतः आप सभी कृषक भाई से अनुरोध है कि किसान प्रशिक्षण योजना को अपनी मेहनत लगन एवं अपने दीर्घ कालीन अनुभव और दृढ़ इच्छा शक्ति से इस कार्यक्रम में भाग लेकर अपना पर्यावरण में सुधार कर, (विश्व पर्यावरण संगठन) का सहयोग करें। इस कार्य के लिये किसान विकास एवं पर्यावरण संस्थान की कुशल प्रशिक्षित टीम व वैज्ञानिक आपकी सेवा में सदैव तत्पर है।

मुख्य प्रबन्धक

किसान विकास एवं पर्यावरण संस्थान

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